• Home
  • About
  • Our Aim
  • Team
  • Photos
  • We Contribute
  • Online Appointment
  • Donate Us
  • FAQs
  • Contact
Menu
  • Home
  • About
  • Our Aim
  • Team
  • Photos
  • We Contribute
  • Online Appointment
  • Donate Us
  • FAQs
  • Contact
Search
Close
Home Latest Articles

कानूनी प्रावधान जो त्वरित न्याय दिला सकते है।

Adv. Dilip Kumar by Adv. Dilip Kumar
February 4, 2022
in Latest Articles
0
कानूनी प्रावधान जो त्वरित न्याय दिला सकते है।
  • Facebook
  • Twitter
  • Pinterest
  • LinkedIn
  • WhatsApp

नीचे लिखे प्रावधानों का कठोरता से पालन करने पर त्वरित न्याय की प्राप्ति मुमकिन है।

  1. घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम 2005 के अधीन प्रस्तुत वाद की सुनवाई, वाद प्रस्तुत करने के दो माह के भीतर किया जाने का कानूनी प्रावधान है।  U/s -12(5) DV Act
  2. N.I.Act के अंतर्गत प्रस्तुत वाद की सुनवाई 06 माह के अंदर किया जाने का कानूनी प्रावधान है। (U/s -143(3) N.I.Act)
  3. POCSO अधिनियम के तहत अपराध का विचरण संज्ञान की तिथि से एक वर्ष के भीतर किया जाना है। U/s- 35(2) POCSO Act.
  4. यदि कोई Injunction आदेश, विरोधी पक्षकार को सूचना दिए बिना दिया गया है, वहाँ न्यायालय उक्त आवेदन को तीस दिन के भीतर निबटाएगा। यदि उक्त तीस दिन के भीतर उकसा निबटारा नहीं होता हो तो नहीं निबटाने का कारण बताएगा होगा।  (U/o – 39, R- 3A CPC)
  5. फॅमिली कोर्ट में प्रस्तुत प्रत्येक आवेदन, (जिसमें डिवोर्स भी शामिल है) कि सुनवाई छः माह के अंदर पुरा करना है। (u/s 21B (2) of the H.M. Act. 1955)
  6. फॅमिली कोर्ट के किसी आदेश के विरुद्ध किए गए अपील की सुनवाई तीन माह के अंदर किया जाने का कानूनी प्रावधान है। (u/s 21B (3) of the H.M. Act. 1955)
  7. पति/पत्नी यदि अक्षम है और दूसरे पक्षकार के विरुद्ध वादकालीन भरण-पोषण या मुकदमे के खर्च हेतु आवेदन देता/देती है तो उस आवेदन का निस्तारण नोटिस के 60 दिनों के भीतर किया जाने का कानूनी प्रावधान है। (u/s 21B (3) of the H.M. Act. 1955)
  8. बच्चे की अभिरक्षा, भरण-पोषण और शिक्षा के लिए आवेदन का निस्तारण प्रतिपक्षी को नोटिस की तमिल से 60 दिनों के अंदर किया जाने का कानूनी प्रावधान है। (u/s 26 of the H.M. Act 1955)
  9. दंड-प्रक्रिया संहिता की धारा 125 के अंतर्गत प्रस्तुत आवेदन की सुनवाई प्रतिपक्षी को नोटिस की तमिल से 60 दिनों के अंदर किया जाने का कानूनी प्रावधान है। (U/s 125 Cr.P.C)
  10. बिहार भूमि विवाद निराकरण अधिनियम 2009 के अंतर्गत प्रस्तुत वाद की सुनवाई वाद प्रस्तुत किया जाने से तीन माह के अंदर किया जाने का कानूनी प्रावधान है। (U/s 09 of the BLDR Act.)

✍ दिलीप कुमार
(अधिवक्ता)

  • Facebook
  • Twitter
  • Pinterest
  • LinkedIn
  • WhatsApp
Previous Post

सौभाग्य संख्या – 01

Next Post

पति-पत्नी की लड़ाई में मुद्दा नामक कोई चीज होती ही नहीं है।

Adv. Dilip Kumar

Adv. Dilip Kumar

Next Post
पति-पत्नी की लड़ाई में मुद्दा नामक कोई चीज होती ही नहीं है।

पति-पत्नी की लड़ाई में मुद्दा नामक कोई चीज होती ही नहीं है।

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Login
Notify of
guest
guest
0 Comments
Oldest
Newest Most Voted

Cases Resolved by the DE

FULL-STOP NO. 16/2026 (Family Dispute)

FULL-STOP NO. 16/2026 (Family Dispute)

by Adv. Dilip Kumar
October 30, 2026
0

DISPUTE-EATER An initiative of Ram Yatan Sharma Memorial Trust Muzaffarpur,...

FULL-STOP NO. 15/2026 (Family Dispute)

FULL-STOP NO. 15/2026 (Family Dispute)

by Adv. Dilip Kumar
October 30, 2026
0

DISPUTE-EATER An initiative of Ram Yatan Sharma Memorial Trust Muzaffarpur,...

FULL-STOP NO. 14/2026 (Family Dispute)

FULL-STOP NO. 14/2026 (Family Dispute)

by Adv. Dilip Kumar
October 30, 2026
0

DISPUTE-EATER An initiative of Ram Yatan Sharma Memorial Trust Muzaffarpur,...

Load More

Latest Articles on DE

दत्तक बच्चे के जन्म प्रमाण-पत्र में दत्तक माता-पिता का नाम और सम्बंधित कानून एक नजर में।

दत्तक बच्चे के जन्म प्रमाण-पत्र में दत्तक माता-पिता का नाम और सम्बंधित कानून एक नजर में।

by Adv. Dilip Kumar
October 14, 2026
0

किसी बच्चे को विधि के अनुसार गोद लेने के बाद...

Complaint केस में “जमानत” की जरूरत खत्म – सर्वोच्च न्यायालय।

Complaint केस में “जमानत” की जरूरत खत्म – सर्वोच्च न्यायालय।

by Adv. Dilip Kumar
May 11, 2026
0

परिवाद (Complaint Case) में अब “अग्रिम जमानत” की जरूरत नहीं...

न्यायिक सुधार की दिशा में एक सार्थक पहल।

न्यायिक सुधार की दिशा में एक सार्थक पहल।

by Adv. Dilip Kumar
March 12, 2026
0

न्यायिक सुधार की दिशा में एक सार्थक पहल।   भारत...

Judgement from the Court

संयुक्त वसीयत की स्थिति में वसीयत का प्रावधान केवल मृतक वसीयतकर्ता की संपत्ति तक ही सीमित होगा जीवित वसीयतकर्ता की संपत्ति पर प्रभावी नहीं होगा-  केरल उच्च न्यायालय।

संयुक्त वसीयत की स्थिति में वसीयत का प्रावधान केवल मृतक वसीयतकर्ता की संपत्ति तक ही सीमित होगा जीवित वसीयतकर्ता की संपत्ति पर प्रभावी नहीं होगा-  केरल उच्च न्यायालय।

January 7, 2023
बहू को है सास-ससुर के घर में रहने का अधिकार – सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला,  

बहू को है सास-ससुर के घर में रहने का अधिकार – सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला,  

September 19, 2022
नोटरी विवाह/तलाक दस्तावेजों को निष्पादित करने के लिए अधिकृत नहीं हैं: – MP HC

नोटरी विवाह/तलाक दस्तावेजों को निष्पादित करने के लिए अधिकृत नहीं हैं: – MP HC

November 24, 2021
Load More
  • Home
  • About
  • Our Aim
  • Team
  • Photos
  • We Contribute
  • Online Appointment
  • Donate Us
  • FAQs
  • Contact
  • Home
  • About
  • Our Aim
  • Team
  • Photos
  • We Contribute
  • Online Appointment
  • Donate Us
  • FAQs
  • Contact
Facebook Twitter Youtube Linkedin
© 2019-2022 – Dispute Eater

Run & Managed by – RAM YATAN SHARMA MEMORIAL TRUST®

made with love at Ambit Solutions (7488039982)
WhatsApp chat
wpDiscuz
0
0
Would love your thoughts, please comment.x
()
x
| Reply