विवादों का धोबी: डिस्प्यूट-ईटर जहाँ झगड़े धुलते हैं और रिश्ते फिर से साफ हो जाते हैं। एक बार की बात...
Read moreभारतीय समाज में वैवाहिक विवादों को प्रायः “कानूनी समस्या” के रूप में देखा जाता है, जबकि उनके बीज अधिकतर सामाजिक-मानसिक...
Read more“Tarikh par Tarikh” is not just a delay. It is the slow killing of justice. Every new date is another...
Read moreभारतीय न्यायिक व्यवस्था में “तारीख पर तारीख” को मात्र न्याय में देरी कहकर टाल देना एक बौद्धिक छल है। यह...
Read moreहिंदू परंपरा में विवाह को केवल सात फेरों की रस्म नहीं माना गया, बल्कि उसे हड्डी से हड्डी और माँस...
Read moreराहुल (काल्पनिक नाम) मेरे सामने बैठा था। उसकी आँखों में न ग़ुस्सा था, न घृणा, बस एक थका हुआ विश्वास...
Read more“मम्मी, क्या यही मेरे पापा हैं?” यह कोई साधारण प्रश्न नहीं था। यह उस बच्ची की आत्मा से निकली हुई...
Read moreवर्ष 2000 की बात है। मेरे गाँव का एक विवाहित व्यक्ति, जिसके तीन छोटे-छोटे बच्चे थे, जिनमें एक दूधमुंहा भी...
Read moreव्यवहार प्रक्रिया संहिता, 1908 में आवश्यक संशोधनों द्वारा सिविल वादों के त्वरित निष्पादन की दिशा में एक पहल भारतीय...
Read moreसर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय का समय किस काम के लिए? भारतीय न्याय व्यवस्था में जमानत का प्रश्न सदैव बहस...
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