Adv. Dilip Kumar

Adv. Dilip Kumar

“मेरे पास पैसा थोड़ा कम है।”

भारतीय समाज में वैवाहिक विवादों को प्रायः “कानूनी समस्या” के रूप में देखा जाता है, जबकि उनके बीज अधिकतर सामाजिक-मानसिक और आर्थिक परिस्थितियों में छिपे होते हैं। अदालतों में लंबित...

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न्याय की लाश

भारतीय न्यायिक व्यवस्था में “तारीख पर तारीख” को मात्र न्याय में देरी कहकर टाल देना एक बौद्धिक छल है। यह साधारण देरी नहीं, बल्कि न्याय का धीमा, सुनियोजित और संस्थागत...

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हर पति–पत्नी को डिस्प्यूट ईटर क्यों जानना चाहिए।

हिंदू परंपरा में विवाह को केवल सात फेरों की रस्म नहीं माना गया, बल्कि उसे हड्डी से हड्डी और माँस से माँस का मिलन कहा गया। यह परिभाषा विवाह को...

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नारी शिक्षा के साथ क्यों कमजोर होती जा रही है विवाह संस्था?

राहुल (काल्पनिक नाम) मेरे सामने बैठा था। उसकी आँखों में न ग़ुस्सा था, न घृणा, बस एक थका हुआ विश्वास और भीतर तक टूटा हुआ मन। वह अपनी पत्नी के...

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“मम्मी, क्या यही मेरे पापा हैं?”

“मम्मी, क्या यही मेरे पापा हैं?” यह कोई साधारण प्रश्न नहीं था। यह उस बच्ची की आत्मा से निकली हुई एक करुण आवाज थी, जो परिवार न्यायालय, की दीवारों से...

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