Adv. Dilip Kumar

Adv. Dilip Kumar

न्यायिक आदेशों में भी Dispute-Eater को  सम्मानपूर्ण स्थान मिलने लगा है।

“डिस्प्यूट-ईटर” अब केवल एक विचार नहीं रहा, बल्कि न्यायिक विमर्श की एक सशक्त धारा बनकर उभर रहा है। सतत प्रयास, मानवीय दृष्टिकोण और विवाद समाधान के प्रति समर्पण का ही...

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Complaint केस में “जमानत” की जरूरत खत्म – सर्वोच्च न्यायालय।

परिवाद (Complaint Case) में अब “अग्रिम जमानत” की जरूरत नहीं — सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला। बिहार और झारखंड में Complaint Case से जुड़े मामलों में लंबे समय से एक...

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न्यायिक सुधार की दिशा में एक सार्थक पहल।

न्यायिक सुधार की दिशा में एक सार्थक पहल।   भारत की न्यायपालिका लोकतंत्र के तीन प्रमुख स्तंभों में से एक है। न्यायपालिका पर जनता का विश्वास ही उसकी सबसे बड़ी...

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“मेरे पास पैसा थोड़ा कम है।”

भारतीय समाज में वैवाहिक विवादों को प्रायः “कानूनी समस्या” के रूप में देखा जाता है, जबकि उनके बीज अधिकतर सामाजिक-मानसिक और आर्थिक परिस्थितियों में छिपे होते हैं। अदालतों में लंबित...

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न्याय की लाश

भारतीय न्यायिक व्यवस्था में “तारीख पर तारीख” को मात्र न्याय में देरी कहकर टाल देना एक बौद्धिक छल है। यह साधारण देरी नहीं, बल्कि न्याय का धीमा, सुनियोजित और संस्थागत...

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