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सुंदर पत्नी, बेरोजगार पति और धनवान पड़ोसी।

Adv. Dilip Kumar by Adv. Dilip Kumar
October 10, 2024
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सुंदर पत्नी, बेरोजगार पति और धनवान पड़ोसी।
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यह कहानी एक पीड़ित पति राजू, सुंदर पत्नी रूपा, धनवान पड़ोसी रौशन और 9 वर्ष की लड़की दीपा की है (सभी नाम काल्पनिक हैं)। राजू और रूपा का परिवार शहर में रहता था। रूपा सम्पन्न परिवार में पैदा हुई थी, जबकि राजू गरीब परिवार में। राजू अगड़ी जाति में पैदा हुआ था, जबकि रूपा पिछड़ी जाति में। पढ़ाई के सिलसिले में दोनों एक-दूसरे के नजदीक आए। रूपा बहुत ही सुंदर लड़की थी, उसकी सुंदरता के कारण ही राजू रूपा के करीब आया। दोनों एक-दूसरे की ओर आकर्षित हुए और अंततः शादी करने का फैसला लिया। दोनों के माता-पिता शादी के लिए सहमत नहीं थे, लेकिन दोनों अपने शहर से हजारों किलोमीटर दूर भागकर शादी कर ली और एक कमरा लेकर रहने लगे।

पत्नी काफी सुंदर थी और पति बेरोजगार था। दोनों की उम्र भी कम थी। बेरोजगार पति रोजगार की तलाश में था; उसे नहीं पता था कि उनके जीवन में भारी मुसीबत आने वाली है। दरअसल, दोनों दंपत्ति जिस मकान में रहते थे, उसके बगल में रौशन नामक एक धनवान युवक रहता था। वह दोनों की गरीबी का लाभ उठाकर पहले रूपा के नजदीक आया, और अंततः वह इतना नजदीक आया कि रूपा और रौशन के बीच गोपनीय कुछ भी नहीं रहा। राजू दिनभर काम करके शाम को घर लौटता था, उसे रूपा और रौशन के संबंधों की कोई जानकारी नहीं थी। इसी बीच रूपा एक बच्ची दीपा की माँ बनी।

एक दिन अचानक रूपा राजू से कहती है:

रूपा: मैं कब तक ऐसी जिंदगी जीती रहूँगी?
राजू: जब तक भगवान की इच्छा होगी।
रूपा: मुझे तुम्हारे साथ नहीं रहना है।
राजू: तुम मायके जाना चाहती हो? हमारे परिवार वाले तो कब का संबंध तोड़ चुके हैं।
रूपा: नहीं, मैं मायके नहीं जाऊँगी।
राजू: (गंभीर मुद्रा में) तब कहाँ जाओगी?
रूपा: तुम्हें क्या मतलब?
राजू: अरे! तुम मेरी पत्नी हो, मतलब मुझे नहीं रहेगी तो दूसरा किसको रहेगा?
रूपा: मुझे हर परिस्थिति में तलाक चाहिए।
राजू: यह क्या बोल रही हो?
रूपा: नहीं, मुझे तलाक चाहिए।

रूपा अपने और रौशन के बीच के संबंधों के बारे में सब कुछ राजू को बता देती है। राजू मन मारकर तैयार हो जाता है। दोनों वकील के पास जाते हैं और सहमति से तलाक की अर्जी डालते हैं। कुछ दिनों बाद तलाक मिल जाता है। तलाक के तुरंत बाद रूपा, रौशन से शादी कर लेती है और अपने एक साल की बेटी के साथ रौशन के घर चली जाती है। रूपा की गरीबी अब दूर हो चुकी है। वह चूड़ियाँ खनकाती है, फिल्मी गीत गुनगुनाती है, और काफी खुश है। वह अपनी बेटी को राजू की तरफ झांकने भी नहीं देती। राजू को रहा नहीं जाता। वह एक दिन रूपा के पास जाता है:

रूपा: क्या बात है?
राजू: कुछ नहीं, यह कमरे की चाबी है, जिसमें हम दोनों कभी साथ-साथ रहते थे। मैंने मकान मालिक को महीने भर का किराया दे दिया है। तुम धनवान व्यक्ति की पत्नी हो गई हो, परंतु फिर भी मेरे कमरे में यदि दीपा के काम की कोई चीज हो तो निकाल लेना। मैं अब दूसरे शहर में जा रहा हूँ, मैं नहीं चाहता कि तुम्हारे दाम्पत्य जीवन में मेरे कारण कोई परेशानी हो। हाँ, एक बात, मेरी बेटी का ख्याल रखना।
रूपा: चिंता करने की कोई बात नहीं है तुम्हें। दीपा तुम्हारी बेटी नहीं है; दीपा के biological पिता रौशन हैं।
राजू: मैं अब कुछ बोलने लायक नहीं हूँ, मैडम। मैं अब जा रहा हूँ।

राजू शहर छोड़कर लगभग 2000 किलोमीटर दूर एक अनजान शहर की ओर रुख करता है। राजू के जाने के बाद रूपा अपना मोबाइल नंबर, ईमेल सब बदल देती है ताकि राजू उससे कोई संपर्क न करें।

अनजान शहर में राजू को एक अच्छा काम मिल जाता है। राजू का बॉस राजू से खुश रहता था। राजू की जिंदगी धीरे-धीरे पटरी पर लौट चुकी थी; बॉस द्वारा एक शादी का प्रस्ताव भी आया था, परंतु राजू ने इनकार कर दिया था। कुछ वर्षों की मेहनत के बाद राजू ने उस शहर में अपने लिए एक छोटा सा मकान भी खरीद लिया था। इस प्रकार राजू और रूपा के बिछड़े 7 वर्ष हो चुके थे।

7 वर्षों बाद राजू के मोबाइल पर एक कॉल आती है। उधर से आवाज आती है कैसे हो राजू? राजू को आवाज पहचानने में कोई कठिनाई नही हुई। वह कॉल किसी और की नहीं बल्कि रूपा का था। रूपा की आवाज सुनकर राजू को विश्वास ही नहीं हो रहा था। उसे समझ ही नही आ रहा था कि आखिर रूपा ने फोन क्यों किया है। दोनों में कोई बात नहीं हो रही थी, क्योंकि रूपा केवल रो रही थी। कुछ देर बाद:

राजू: बोलिए, मैडम, कैसे याद आई?
रूपा: मैडम मत बोलो, राजू।
राजू: तो मैं क्या बोलूँ?
रूपा: मुझे रूपा बोलो।
राजू: नहीं, रूपा तो मेरी पत्नी थी। जो अब धनवान व्यक्ति की पत्नी हो गई है।
रूपा: नहीं राजू, रौशन ने मुझे घर से निकाल दिया है!
राजू: तुम अभी कहाँ हो?
रूपा: आईटी चौराहा पर।
राजू: तुम्हारे साथ और कौन है?
रूपा: मैं और दीपा।
राजू: तुम एयरपोर्ट आ जाओ, मैं दोनों का टिकट तुम्हारे मोबाइल पर भेज रहा हूँ।

राजू और रूपा के शहर के बीच लगभग 2000 किमी की दूरी है। रूपा एयरपोर्ट पर आती है, जहाँ से फ्लाइट से वह राजू के शहर पहुँचती है। राजू पहले से एयरपोर्ट पर रूपा का इंतजार कर रहा था। एयरपोर्ट पर दोनों एक-दूसरे के साथ लिपटते हैं, जी भरकर रोते हैं।

राजू और रूपा कानूनी सलाह के लिए वकील के पास जाते हैं।
राजू और रूपा: हम दोनों पुनः शादी करना चाहते हैं।
वकील: जब तक रौशन और रूपा का तलाक नहीं हो जाता, तब तक आप दोनों की शादी नहीं हो सकती है।

रूपा रौशन से सहमति से तलाक का निवेदन करती है, परंतु रौशन न तो तलाक देने को तैयार होता है और न ही रूपा को अपने साथ रखने को। रूपा को तलाक की अर्जी न्यायालय में प्रस्तुत करनी पड़ती है, जो अभी न्यायालय में लंबित है। दीपा, रूपा और राजू साथ-साथ तो रह रहे हैं, परंतु कानून के नजर में रूपा राजू की रखैल है और दीपा राजू की वैध बेटी भी नहीं है। अपने ही गलत निर्णय के कारण आज रूपा पत्नी से रखैल हो गई है।

✍️ डिस्प्यूट-ईटर

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