• Home
  • About
  • Our Aim
  • Team
  • Photos
  • We Contribute
  • Online Appointment
  • Donate Us
  • FAQs
  • Contact
Menu
  • Home
  • About
  • Our Aim
  • Team
  • Photos
  • We Contribute
  • Online Appointment
  • Donate Us
  • FAQs
  • Contact
Search
Close
Home Judgement

भरण-पोषण के आदेश की अवहेलना पर पति को तीन महीने के लिए जेल:- सर्वोच्च न्यायालय।

Adv. Dilip Kumar by Adv. Dilip Kumar
March 30, 2021
in Judgement
0
भरण-पोषण के आदेश की अवहेलना पर पति को तीन महीने के लिए जेल:- सर्वोच्च न्यायालय।
  • Facebook
  • Twitter
  • Pinterest
  • LinkedIn
  • WhatsApp

अपनी पत्नी को मासिक भरण-पोषण के साथ-साथ बकाया भरण-पोषण/भत्ते का भुगतान के न्यायिक आदेश की अवहेलना पति को महंगा पड़ा। दिनांक 22.03.2021 के आदेश में माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि, ”हम पहले ही पति को काफी लंबा समय दे चुके हैं, पति ने उक्त अवसरों का उपयोग नहीं किया है। इसलिए, हम इस अदालत की अवमानना के लिए पति को दंडित करते हैं और उसे तीन महीने के सिविल कारावास की सजा देते हैं”। वास्तव में माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने पति को एक आखिरी मौका दिया था ताकि वह भरण-पोषण भत्ते की सारी बकाया राशि का भुगतान कर सके और कोर्ट द्वारा पूर्व में तय किए गए मासिक भरण-पोषण का भुगतान भी शुरू कर दे। शीर्ष अदालत ने कहा था कि एक पति अपनी पत्नी को भरण-पोषण देने की जिम्मेदारी को त्याग नहीं सकता है और यह उसका कर्तव्य है कि वह अपनी पत्नी को भरण-पोषण का भुगतान करे।”। पति दूरसंचार क्षेत्र में राष्ट्रीय सुरक्षा की एक परियोजना पर काम करता है, उसने न्यायालय को कहा था कि उसके पास पैसे नहीं हैं, उसने पूरी राशि का भुगतान करने के लिए दो साल का समय मांगा था परंतु उक्त अवधि में भी राशि का भुगतान नहीं किया। शीर्ष अदालत ने कहा कि पति ने अदालत के आदेश का पालन करने में बार-बार विफल होकर अपनी विश्वसनीयता खो दी है और आश्चर्य की बात है कि इस तरह के मामले से संबंधित व्यक्ति कैसे राष्ट्रीय सुरक्षा की परियोजना से जुड़ा है।

पत्नी ने वर्ष 2009 में चेन्नई में मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट अदालत के समक्ष घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम के तहत मामला दायर किया था। ट्रायल कोर्ट द्वारा पति को निर्देशित किया गया था और अपीलीय अदालत व हाईकोर्ट ने भी पत्नी को दो हेड के तहत पैसा देने का निर्देश दिया था। जिसमें 1.75 लाख रुपये का मासिक भरण-पोषण शामिल है और दूसरा वर्ष 2009 से भरण-पोषण का बकाया शामिल है, जिसकी राशि लगभग 2.60 करोड़ रुपये है। अदालत ने पत्नी को तब तक घर में रहने की अनुमति दी थी जब तक कि पति उसके स्थायी निवास के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं कर देता है। इस आदेश के खिलाफ पति द्वारा दायर अपील पर सत्र अदालत ने पत्नी को मुआवजा देने के निर्देश को रद्द कर दिया था और भरण-पोषण की राशि को भी कम कर दिया था। अपीलीय अदालत ने उसे याचिका दायर करने की तारीख से भरण-पोषण के रूप में प्रति माह 01 लाख रुपये का भुगतान करने का निर्देश दिया था और उक्त तिथि से ही आवासीय निवास के लिए 75,000 रुपये प्रति माह देने के लिए भी कहा था। हाईकोर्ट ने 02 दिसंबर, 2016 को सत्र न्यायालय के आदेश को बरकरार रखा, जिसके बाद पति ने शीर्ष अदालत में अपील दायर की, जिसे शीर्ष अदालत ने 26 अक्टूबर, 2017 को खारिज करते हुए निर्देश दिया था कि वह छह महीने के भीतर वह भरण-पोषण और बकाया राशि को भुगतान कर दे। तत्पश्चात पत्नी द्वारा 2018 में एक रिव्यू याचिका दायर की गई और पति को हर महीने के 10 वें दिन तक 1.75 लाख रुपये के भरण-पोषण का बकाया चुकाने का निर्देश दिया गया था। पति द्वारा न्यायालय के आदेश को नहीं मानना को न्यायालय का अवमानना माना और उपरोक्त आदेश सुनाया।
For judgement Click below:-

DV Contempt

 

  • Facebook
  • Twitter
  • Pinterest
  • LinkedIn
  • WhatsApp
Previous Post

पारिवारिक विवाद में प्रस्तुत किए जानेवाला शपथ-पत्र का प्रारूप।

Next Post

निजी स्कूल लॉकडाउन अवधि के सम्पूर्ण फी की मांग नहीं कर सकते: -सर्वोच्च न्यायालय

Adv. Dilip Kumar

Adv. Dilip Kumar

Next Post

निजी स्कूल लॉकडाउन अवधि के सम्पूर्ण फी की मांग नहीं कर सकते: -सर्वोच्च न्यायालय

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Login
Notify of
guest
guest
0 Comments
Oldest
Newest Most Voted
Inline Feedbacks
View all comments

Cases Resolved by the DE

Full Stop No. 03/2026 (Family – Dispute)

Full Stop No. 03/2026 (Family – Dispute)

by Adv. Dilip Kumar
March 27, 2026
0

 Dispute-Eater Run & Managed by Ram Yatan Sharma Memorial Trust...

Full Stop No. 02/2026 (Family – Dispute)

Full Stop No. 02/2026 (Family – Dispute)

by Adv. Dilip Kumar
January 31, 2026
0

Dispute-Eater Run & Managed by Ram Yatan Sharma Memorial Trust...

Full Stop No. 01/2026 (Family – Dispute)

Full Stop No. 01/2026 (Family – Dispute)

by Adv. Dilip Kumar
January 31, 2026
0

Dispute-Eater Run & Managed by Ram Yatan Sharma Memorial Trust...

Load More

Latest Articles on DE

न्यायिक सुधार की दिशा में एक सार्थक पहल।

न्यायिक सुधार की दिशा में एक सार्थक पहल।

by Adv. Dilip Kumar
March 12, 2026
0

न्यायिक सुधार की दिशा में एक सार्थक पहल।   भारत...

विवादों का धोबी: डिस्प्यूट-ईटर।

विवादों का धोबी: डिस्प्यूट-ईटर।

by Adv. Dilip Kumar
March 7, 2026
0

विवादों का धोबी: डिस्प्यूट-ईटर जहाँ झगड़े धुलते हैं और रिश्ते...

“मेरे पास पैसा थोड़ा कम है।”

“मेरे पास पैसा थोड़ा कम है।”

by Adv. Dilip Kumar
February 14, 2026
0

भारतीय समाज में वैवाहिक विवादों को प्रायः “कानूनी समस्या” के...

Judgement from the Court

संयुक्त वसीयत की स्थिति में वसीयत का प्रावधान केवल मृतक वसीयतकर्ता की संपत्ति तक ही सीमित होगा जीवित वसीयतकर्ता की संपत्ति पर प्रभावी नहीं होगा-  केरल उच्च न्यायालय।

संयुक्त वसीयत की स्थिति में वसीयत का प्रावधान केवल मृतक वसीयतकर्ता की संपत्ति तक ही सीमित होगा जीवित वसीयतकर्ता की संपत्ति पर प्रभावी नहीं होगा-  केरल उच्च न्यायालय।

January 7, 2023
बहू को है सास-ससुर के घर में रहने का अधिकार – सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला,  

बहू को है सास-ससुर के घर में रहने का अधिकार – सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला,  

September 19, 2022
नोटरी विवाह/तलाक दस्तावेजों को निष्पादित करने के लिए अधिकृत नहीं हैं: – MP HC

नोटरी विवाह/तलाक दस्तावेजों को निष्पादित करने के लिए अधिकृत नहीं हैं: – MP HC

November 24, 2021
Load More
  • Home
  • About
  • Our Aim
  • Team
  • Photos
  • We Contribute
  • Online Appointment
  • Donate Us
  • FAQs
  • Contact
  • Home
  • About
  • Our Aim
  • Team
  • Photos
  • We Contribute
  • Online Appointment
  • Donate Us
  • FAQs
  • Contact
Facebook Twitter Youtube Linkedin
© 2019-2022 – Dispute Eater

Run & Managed by – RAM YATAN SHARMA MEMORIAL TRUST®

made with love at Ambit Solutions (7488039982)
WhatsApp chat
wpDiscuz
0
0
Would love your thoughts, please comment.x
()
x
| Reply