पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने पिछले महीने एक जोड़े को तलाक की अनुमति दे दी। यह जोड़ा शादी के बाद केवल दो दिनों तक साथ रहा था। अपनी याचिका में जोड़े ने प्रार्थना की थी कि धारा 13-बी के तहत याचिका दायर करने से पहले विवाह विच्छेद के अधिनियम की एक वर्ष की अनिवार्य अवधि को माफ किया जाए।
शादी 15 फरवरी, 2021 को हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार संपन्न हुई थी। दोनों मात्र दो दिनों तक साथ रहे। 17 फरवरी को लड़की अपने माता-पिता के घर वापस आ गई। 20 मई 2021 को हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13-बी के तहत एक संयुक्त याचिका दायर कर आपसी सहमति से तलाक की डिक्री की मांग की गई। परिवार न्यायालय, गुरुग्राम ने जुलाई, 2021 में विवाह विच्छेद की मांग वाली याचिका को इस आधार पर खारिज कर दिया कि याचिका शादी के एक वर्ष के भीतर प्रस्तुत किया गया है।
हाईकोर्ट की खंडपीठ ने कहा कि एक वर्ष की समाप्ति से पहले धारा 13-बी के तहत एक याचिका प्रस्तुत करने के उद्देश्य से अधिनियम की धारा 14 प्रासंगिक है। न्यायालय ने कहा, “उपरोक्त धारा के प्रावधान में कहा गया कि असाधारण कठिनाई या असाधारण भ्रष्टता के मामले में यदि यह न्यायालय को प्रतीत होता है, तो एक वर्ष का समय कम किया जा सकता है।”
माननीय न्यायालय ने मनदीप कौर बाजवा बनाम चेतनजीत सिंह रंधावा के मामला का हवाला देकर कहा कि दोनों पक्ष शादी के बाद लगभग तीन महीने तक पति-पत्नी के रूप में साथ रहे। दोनों युवा थे और यह ध्यान में रखते हुए कि वे विवाह योग्य उम्र में थे, एक वर्ष की अवधि की छूट की अनुमति दी गई थी।
दोनों पक्ष वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए अदालत में पेश हुए और अदालत को सूचित किया कि उनके बीच कोई विवाद नहीं है। कोर्ट ने कहा कि, “विवाह के समय अपीलकर्ता शिवानी यादव की आयु 22½ वर्ष थी और वह एमएससी की छात्रा थी। प्रतिवादी अमित यादव की आयु साढ़े 23 वर्ष थी। दोनों युवा हैं।” चूंकि, युगल केवल दो दिनों के लिए एक साथ रहे थे, इसलिए एक वर्ष की अनिवार्य अवधि को माफ करने के लिए अधिनियम की धारा 14 के तहत दायर उनके आवेदन को अनुमति देने के लिए यह पर्याप्त आधार है।
✍ दिलीप कुमार
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Marriage Petition before one year of the marriage










