किसी बच्चे को विधि के अनुसार गोद लेने के बाद उसके जन्म प्रमाण-पत्र में दत्तक माता-पिता का नाम दर्ज कराया जा सकता है या नहीं? यह प्रश्न उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण है, जो दत्तक ग्रहण के माध्यम से बच्चे को परिवार का हिस्सा बनाते हैं। इस विषय में दत्तक ग्रहण की वैधता और जन्म पंजीकरण की निर्धारित प्रक्रिया, दोनों का पालन आवश्यक है।
मामले के तथ्य
एक मामले में बच्चे की वास्तविक जन्मतिथि 11.11.2022 थी। जन्म के समय उसका नाम जन्म एवं मृत्यु रजिस्टर में दर्ज नहीं कराया गया था। बाद में, दिनांक 12.04.2023 को हिंदू विधि के अनुसार बच्चे को गोद लिया गया। दिनांक 25.04.2024 को दत्तक विलेख का विधिवत निबंधन कराया गया। इसके बाद, दिनांक 20.01.2025 को बच्चे का पहली बार जन्म पंजीकरण कराकर जन्म प्रमाण-पत्र बनवाया गया। प्रमाण-पत्र में बच्चे की वास्तविक जन्मतिथि में कोई परिवर्तन नहीं किया गया, लेकिन जैविक माता-पिता के स्थान पर दत्तक माता-पिता के नाम दर्ज कराए गए। जन्म के विलंबित पंजीकरण से पहले सक्षम मजिस्ट्रेट का आदेश भी प्राप्त किया गया था।
अब प्रश्न यह है कि क्या ऐसा करना विधिसम्मत था?
- हिंदू दत्तक और भरण-पोषण अधिनियम, 1956 की भूमिका: – इस अधिनियम की धाराएँ 5, 6 और 11 दत्तक ग्रहण की वैधता तथा उसकी आवश्यक शर्तों से संबंधित हैं। दत्तक ग्रहण तभी वैध होगा, जब अधिनियम की लागू शर्तों का पालन किया गया हो।
धारा 12 के अनुसार, वैध दत्तक ग्रहण के बाद बच्चा दत्तक माता-पिता का बच्चा माना जाता है और दत्तक परिवार में उसके कानूनी संबंध स्थापित होते हैं, अधिनियम में निर्धारित अपवादों के अधीन।
धारा 16 के अनुसार, विधिवत निबंधित दत्तक विलेख के संबंध में न्यायालय दत्तक ग्रहण के अधिनियम के अनुरूप होने की खंडनीय उपधारणा कर सकता है। हालांकि, केवल विलेख का निबंधन ही दत्तक ग्रहण की सभी कानूनी शर्तों के पालन का अंतिम प्रमाण नहीं है।
- जन्म एवं मृत्यु रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1969 का प्रावधान: – इस मामले में जन्म एवं मृत्यु रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1969 की धारा 13(3) विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। जन्म के एक वर्ष से अधिक समय बाद पहली बार पंजीकरण कराने के लिए इस धारा के अंतर्गत सक्षम अधिकारी का निर्धारित आदेश आवश्यक है।
चूँकि बच्चे की जन्मतिथि 11.11.2022 थी और जन्म प्रमाण-पत्र 20.01.2025 को बनवाया गया, इसलिए यह एक वर्ष से अधिक विलंब के बाद कराया गया पंजीकरण था। ऐसी स्थिति में संबंधित आदेश और पंजीकरण की प्रक्रिया विधि के अनुसार होना आवश्यक है।
- क्या दत्तक माता-पिता का नाम दर्ज कराना सही था? – इस प्रश्न का उत्तर दत्तक ग्रहण की वैधता और जन्म पंजीकरण की प्रक्रिया पर निर्भर करता है। यदि दत्तक ग्रहण हिंदू दत्तक और भरण-पोषण अधिनियम, 1956 के अनुसार वैध था, दत्तक विलेख विधिवत निबंधित था और जन्म का विलंबित पंजीकरण सक्षम अधिकारी के वैध आदेश के आधार पर कराया गया था, बच्चे की वास्तविक जन्मतिथि में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है, तो जन्म प्रमाण-पत्र में दत्तक माता-पिता का नाम दर्ज कराना वैध था।
निष्कर्ष
दत्तक ग्रहण केवल एक पारिवारिक निर्णय नहीं, बल्कि कानूनी जिम्मेदारी भी है। बच्चे की पहचान और अधिकारों की रक्षा के लिए दत्तक ग्रहण की वैधता तथा जन्म पंजीकरण की निर्धारित प्रक्रिया, दोनों का पालन करना आवश्यक है। इस मामले में उपलब्ध तथ्यों के आधार पर दत्तक माता-पिता का नाम जन्म प्रमाण-पत्र में दर्ज कराना विधिसम्मत है।
दिलीप कुमार अधिवक्ता









